जिस मिट्टी के लिए जिए, उसी में मिल गए…तिरंगे में लिपटे 'अजित दादा' की आखिरी यात्रा, हर आंख नम
बारामती के विद्या प्रतिष्ठान में अजीत पवार के अंतिम दर्शन के लिए चारों दिशाओं से लोग उमड़ पड़े हैं. अजीत पवार, जो बारामती के बेटे थे, अब हमेशा के लिए इस मिट्टी में मिल जाने के लिए लौट रहे हैं.उनके चाहने वाले, प्रशंसक, पार्टी के सदस्य और गांव के लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए इकट्ठा हो रहे हैं. पार्थिव शरीर उनके पैतृक आवास से विद्या प्रतिष्ठान की ओर बढ़ रहा है, और लोग छतों पर और सड़क के किनारे खड़े होकर उन्हें अंतिम विदाई दे रहे हैं. अजीत पवार का अंतिम रोड शो है, जिसमें वे खामोश, कफन में लिपटे हुए हैं, और उनके शव पर तिरंगा चढ़ाया गया है. उनके परिवार के सदस्य भी इस यात्रा में शामिल हैं.
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