कोई कह रहा रुक जाओ दादा… कोई छतों पर चढ़कर कर रहा अंतिम दर्शन, जाने नहीं देना चाहता जनसैलाब
Ajit Pawar Last Journey: अजीत पवार, जो बारामती के बेटे थे, अब हमेशा के लिए इस मिट्टी में मिल जाने के लिए लौट रहे हैं.उनके चाहने वाले, प्रशंसक, पार्टी के सदस्य और गांव के लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए इकट्ठा हो रहे हैं.मेन रोड पर लोगों का सैलाब उमड़ा हुआ है. कोई उन्हें जाने नहीं देना चाहता। सड़क के किनारे ही नहीं, बल्कि छतों पर खड़े होकर भी लोग उनके अंतिम दर्शन कर रहे हैं. जिनको पास से देखने का मौका नहीं मिला, वे दूर से ही हाथ जोड़कर नम आंखों से विदाई दे रहे हैं. माहौल बेहद भावुक है- लोग रो रहे हैं, सिसक रहे हैं. बारामती आज अपने दादा को खोने का दर्द महसूस कर रही है. सच में, अजीत दादा सिर्फ एक नेता नहीं थे, वे इस मिट्टी की आवाज थे.
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