सहरसा कोर्ट ने दो आरोपियों को 4 साल की सजा:SC/ST एक्ट के तहत दोषी करार, 5000 रुपये का अर्थदंड भी लगा
सहरसा पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य और चार्जशीट के आधार पर, सलखुआ थाना में सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया गया। सहरसा के विशेष न्यायाधीश (अनुसूचित जाति/जनजाति) सह जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने दो आरोपियों को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए कठोर सजा सुनाई है। इस मामले में प्रसबन्नी, वार्ड संख्या-11, थाना सलखुआ, जिला सहरसा निवासी दिनेश यादव और गणेश यादव को आरोपी बनाया गया था। उन्हें भारतीय दंड संहिता (भादवि) और अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST POA एक्ट) की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी सिद्ध किया गया। अदालत ने आरोपियों को धारा 341 भादवि के तहत एक माह का साधारण कारावास, धारा 323 भादवि के तहत एक वर्ष का साधारण कारावास और धारा 325 भादवि के तहत चार वर्ष का सश्रम कारावास तथा 5,000 रुपये का अर्थदंड सुनाया। अर्थदंड अदा न करने पर उन्हें तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अतिरिक्त, उन्हें धारा 504 भादवि के अंतर्गत एक वर्ष का सश्रम कारावास, धारा 506 भादवि के तहत एक वर्ष का सश्रम कारावास और SC/ST (POA) एक्ट की धारा 3(1)(r) के तहत एक वर्ष का सश्रम कारावास की सजा भी दी गई है। न्यायालय के आदेशानुसार, सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अमरेन्द्र कुमार ने इस मामले की प्रभावी ढंग से पैरवी की। उन्होंने गवाहों के बयान, चिकित्सीय साक्ष्य और पुलिस द्वारा संकलित दस्तावेजों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसके आधार पर न्यायालय ने आरोपियों को दोषी ठहराया। इस फैसले को सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। न्यायालय के इस निर्णय से यह संदेश गया है कि अनुसूचित जाति/जनजाति के विरुद्ध अपराध करने वालों को कानून किसी भी स्थिति में नहीं बख्शेगा। पीड़ित पक्ष ने न्यायालय के फैसले पर संतोष व्यक्त किया है।
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