कटिहार सदर प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय नीचा टोला, दलन पश्चिम पंचायत में कार्यरत शिक्षक सत्यजीत कुमार सिंह का ब्रेनहेमरेज से निधन हो गया। वे 2014 से पंचायत शिक्षक के रूप में कार्यरत थे। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार बिहार में 26 जुलाई 2025 से मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण कार्य का आयोजन किया गया था। इस कार्य में सत्यजीत कुमार सिंह को BLO पर्यवेक्षक के रूप में कटिहार प्रखंड कार्यालय में प्रतिनियुक्त किया गया था। उनके अधीन मतदान केंद्र संख्या 57 से 69 तक के बूथ स्तर के पदाधिकारी कार्यरत थे। कार्यालय के दबाव से हुआ ब्रेनहेमरेज परिजन का आरोप है कि निर्वाचन आयोग तथा प्रखंड व जिला स्तर के अधिकारी कार्य के लिए अत्यधिक दबाव बना रहे थे। इसी दबाव के बीच 28 जुलाई को प्रखंड कार्यालय स्थित ट्रायसेम भवन में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें पहले घर और फिर हालत गंभीर होने पर कटिहार मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों ने बताया कि उन्हें ब्रेन स्ट्रोक आया है जो अत्यधिक मानसिक दबाव का परिणाम हो सकता है। डॉक्टरों की सलाह पर परिवार उन्हें कोलकाता स्थित पियरलेस अस्पताल ले गया। कोलकाता में जांच के दौरान पता चला कि उनके मस्तिष्क के सेरेबेल्लम हिस्से में ब्लड क्लॉटिंग हो गई है। क्लॉटिंग की गंभीरता के कारण उनकी हालत तेजी से बिगड़ती गई। 31 जुलाई 2025 को सुबह 8:00 बजे उनका निधन हो गया। परिजनों और शिक्षक संघ ने चुनाव आयोग और जिला प्रशासन पर अत्यधिक कार्य दबाव डालने का आरोप लगाया है। वे सत्यजीत कुमार सिंह के परिवार के लिए उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं। फोन पर परिजन को मिली थी जानकारी मृतक के साढू अरविंद कुमार ने बताया कि फोन पर हमें जानकारी मिली की सत्यजीत की तबीयत बिगड़ गई है। उन्हें कटिहार मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। इसके बाद हमलोग अस्पताल पहुंचे। वहां से टेस्ट करवाने के बाद उन्हें कोलकाता रेफर कर दिया गया। जहां इलाज के दौरान कल उनका निधन हो गया। BLO कर्मी आशुतोष आशु ने बताया कि सत्यजीत के अंदर 14 बीएलओ था। एक महीने से वो वर्कलोड को लेकर प्रेशर में थे। प्रखंड के सभी सुपरवाइजर के ऊपर कम समय में काम निपटाने दबाव है। सब की अलग-अलग शारीरिक-मानसिक क्षमता होने की वजह से कुछ लोग सर्वाइव कर लेते हैं कुछ नहीं कर पाते। विभाग का प्रेशर वो सह नहीं पाए। जिस वजह से वो पैरालाइज हो गए और उनका ब्रेनहैमरेज हो गया। साथ ही, उनका समय पर इलाज भी नहीं हुआ। अगर, टाइम से इलाज होता तो उनकी जान बच सकती थी। पीड़ित परिवार को सहायता देने की मांग शिक्षक सफीकुशमा ने बताया कि कार्यालय के प्रेशर से काम करते-करते सुपरवाइजर की मौत हुई है। ऐसे में निर्वाचन आयोग को पीड़ित परिवार को सही मुआवजा देना चाहिए। शिक्षक संघ के अध्यक्ष नवनीत कुमार ने बताया कि सत्यजीत के अंदर 10-12 बीएलओ थे। काम का इतना प्रेशर था कि हर दिन वो रात के 11 बजे तक काम कर रहे होते थे। विभाग से जल्द काम खत्म करने का दबाव बनाया जा रहा था। वे हर दिन का काम अपना सही से करते भी थे। काम के दौरान बिगड़ी तबीयत 28 जुलाई सोमवार को प्रखंड कार्यालय में काम करते समय उनकी तबीयत बिगड़ गई। हमलोग उन्हें मेडिकल कॉलेज ले गए। साथ ही, उनके परिवार को भी सूचना दिए। वहां सीटी स्कैन कराया गया। रिपोर्ट में पता चला कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ गया था, जिससे उनके ब्रेन में स्ट्रोक हुआ है। इसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए कोलकाता रेफर कर दिया गया। 29 जुलाई की रात में वहां उन्हें भर्ती कराया गया। इसके बाद उनका ट्रीटमेंट स्टार्ट हुआ, लेकिन अगले दिन सुबह उनका निधन हो गया।