“एडमिट कार्ड में सुधार के नाम पर 15 छात्रों का भविष्य खतरे में: भगवानपुर, रजौली (नवादा) की गंभीर लापरवाही”

बिहार के नवादा ज़िला अंतर्गत रजौली प्रखंड के भगवानपुर स्थित उत्क्रमित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, भगवानपुर, रजौली, नवादा (बिहार) से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार विद्यालय के करीब 15 छात्रों के एडमिट कार्ड में नाम, जन्मतिथि, विषय या अन्य विवरण में त्रुटि पाई गई। इन त्रुटियों को समय रहते सही नहीं कराया गया, जिससे अब इन छात्रों का परीक्षा में बैठना, रिजल्ट आना और आगे की पढ़ाई सब कुछ खतरे में पड़ गया है। छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन और संबंधित शिक्षा कार्यालय की लापरवाही के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। एडमिट कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ में गलती होना केवल तकनीकी चूक नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।

Feb 3, 2026 - 15:04
Feb 3, 2026 - 16:06
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⚠️ छात्रों को किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है?

इस तरह की गलती से छात्रों को निम्नलिखित गंभीर समस्याएं हो सकती हैं:

  1. परीक्षा में प्रवेश से वंचित होना

  2. रिजल्ट रोक दिया जाना या अमान्य होना

  3. आगे की कक्षा / कॉलेज में एडमिशन में बाधा

  4. सरकारी स्कॉलरशिप, छात्रवृत्ति से वंचित होना

  5. मानसिक तनाव, डिप्रेशन और आत्मविश्वास में गिरावट

  6. एक पूरा शैक्षणिक वर्ष बर्बाद होने का खतरा

यह केवल कागज़ी गलती नहीं, बल्कि छात्रों के जीवन की दिशा बदलने वाली चूक है।


  इस लापरवाही की जिम्मेदारी किसकी बनती है?

इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए:

  • विद्यालय प्रधानाध्यापक (Headmaster)

  • स्कूल का परीक्षा / डेटा एंट्री प्रभारी

  • प्रखंड / जिला शिक्षा कार्यालय (BEO / DEO)

  • बोर्ड या शिक्षा विभाग का तकनीकी सिस्टम (यदि सुधार पोर्टल समय पर नहीं खुला)

यदि यह साबित होता है कि समय रहते सुधार का मौका होते हुए भी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह कर्तव्य में घोर लापरवाही मानी जाएगी।


⚖️ दोषियों को क्या सज़ा मिलनी चाहिए?

जनहित को देखते हुए निम्न कार्रवाई ज़रूरी है:

  1. ? उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन

  2. ? दोषी अधिकारियों/कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस

  3. निलंबन या वेतन कटौती जैसी विभागीय कार्रवाई

  4. भविष्य में ऐसी गलती न हो, इसके लिए लिखित SOP लागू

  5. छात्रों को हुए मानसिक व शैक्षणिक नुकसान के लिए मुआवज़ा


  छात्रों को ऐसी परेशानी से कैसे बचाया जा सकता है? (समाधान)

✔️ तात्कालिक समाधान:

  • बोर्ड द्वारा विशेष सुधार विंडो (Special Correction Window) खोली जाए

  • छात्रों को अस्थायी अनुमति (Provisional Entry) देकर परीक्षा में बैठने दिया जाए

✔️ स्थायी समाधान:

  1. डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम (छात्र + अभिभावक दोनों से पुष्टि)

  2. एडमिट कार्ड जारी होने से पहले Mandatory Checking Day

  3. स्कूल स्टाफ को नियमित प्रशिक्षण

  4. हेल्पलाइन नंबर और शिकायत पोर्टल

  5. स्कूल स्तर पर नोटिस और जागरूकता अभियान


जनहित की मांग

यह मामला केवल 15 छात्रों का नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की जवाबदेही का है।
यदि आज इस पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो कल किसी और छात्र का भविष्य इसी तरह खतरे में पड़ सकता है।

छात्रों का भविष्य भगवान भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।
जिम्मेदारी तय हो, कार्रवाई हो और न्याय मिले — यही जनता की मांग है।

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