GK: हजारों किलोमीटर उड़कर हर साल यहां आते हैं एक से बढ़कर एक विदेशी पक्षी, इस बात का भी है संकेत
कॉमन क्रेन, गीज़ और कुछ बतखें धान, गेहूं और मक्का के बचे हुए दाने, घास के बीज और कीट-पतंगे खाती हैं. किसान के खेत इनके लिए प्राकृतिक बुफे जैसे होते हैं. यही वजह है कि प्रवासी पक्षी अक्सर फसलों के पास झुंड में दिखाई देते हैं. साइबेरिया और मध्य एशिया से आने वाले छोटे पक्षी जैसे वार्बलर, थ्रश, फ्लाइकैचर और कुछ प्रजाति के स्टारलिंग फल, जामुन, अंजीर, बेर, कीड़े-मकोड़े और इल्ली खाते हैं. ये पक्षी...
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