शंभू गर्ल्स हॉस्टल में 6 जनवरी को क्या हुआ,देखिए VIDEO:कैसे खोला दरवाजा, लड़कियां क्या चिल्ला रही थीं, कौन-कौन अंदर घुसा
पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET छात्रा की संदिग्ध मौत मामले में बड़ा अपडेट सामने आ रहा है। भास्कर के पास 9:54 सेकेंड का शंभू गर्ल्स हॉस्टल के अंदर का एक्सक्लूसिव CCTV फुटेज है। इस फुटेज में बार-बार दरवाजा खटखटाना, लड़की को नाम लेकर पुकारना, एक-दो महिलाओं और पुरुषों की एंट्री दिखाई दे रही है। इसके बाद जबरन दरवाजा खोले जाने तक की पूरी कड़ी है। छात्रा के रूम का दरवाजा ऊपर से हाथ डालकर खोला गया। देखिए 6 जनवरी को दिन में शंभू गर्ल्स हॉस्टल में क्या-क्या हुआ… दोपहर के 3:50 बजे- छात्रा के केबिन के बाहर हलचल होती है। बगल के केबिन की लड़कियां एक-एक कर जमा होने लगती हैं। देखते ही देखते 4-5 लडकियां जमा हो जाती हैं। इसी में से एक लड़की बार-बार नाम लेकर पुकार रही है और गेट खोलने के लिए कहती नजर आ रही है। दूसरी लड़की पूछती है क्या हुआ। तो जवाब मिलता है बार-बार आवाज देने के बाद भी गेट नहीं खोल रही है। दोपहर 3:50:57- पर एक लड़की पास में मौजूद टेबल पर चढ़कर केबिन में दोबारा झांकती है। इसके बाद दूसरी लड़कियां उसके दरवाजे को खटखटाना शुरू करती हैं। खटखटाने के बाद भी केबिन का दरवाजा नहीं खुलता है। दोपहर 3:51:07- हॉस्टल की लड़कियां उसके केबिन के बाहर आपस में इसे लेकर बातचीत करने लगती हैं। फिर दोबारा दरवाजा खटखटाना शुरू करती हैं। फिर भी नहीं खुलता है। दोपहर 3:51:40- हॉस्टल की दूसरी लड़कियां भी एक-एक कर के उसके केबिन के पास आना शुरू कर देती हैं। सभी लड़कियां जोर जोर से एक बार फिर से नाम पुकारने लगती हैं... निर्भया.…निर्भया.…गेट खोलिए ना… लड़कियां कहती हैं दीदी…ओ दीदी, गेट खोलिए ना। कुछ बोल क्यों नहीं रही हैं। दोपहर 3:55 बजे - गलियारे में एक महिला की एंट्री होती है। लड़कियों से क्या हुआ.…पूछती हुई केबिन की ओर बढ़ती है। लड़कियां बताती हैं, निर्भया गेट नहीं खोल रही है। वो भी अपने स्तर से दरवाजे पिटती है, फिर भी गेट नहीं खुलता है। दोपहर 3:56:33 - गलियारे में वो महिला पैसेज की लाइट ऑन करती है और फिर निर्भया के केबिन के गेट पर जाती है। दोपहर 3:57:48 - गलियारे में एक शख्स की एंट्री होती है। वो ये कहते उसके दरवाजे की ओर बढ़ रहा है कि...गेट नहीं खोल रही है। सोई हुई है। फिर वो दरवाजे पर पहुंचकर उसके केबिन में झांकता है। इस दौरान साथ खड़ी लड़कियां तेज आवाज में गेट खोलने का कहती रहती हैं। कुछ लड़कियां डांटकर कहती हैं गेट खोलिए ना। इस दौरान दरवाजा भी पीट जाता है। दोपहर 3:58:55 - गलियारे में जोर से खींचते हुए निर्भया के केबिन के दरवाजे के गेट को खोल देता है। इसके बाद सभी उसके केबिन में दाखिल हो जाते हैं। दूसरे केबिन की भी लड़कियां घूस जाती हैं। दोपहर 3:59:15 - गलियारे में एक महिला पीली साड़ी में तेजी से पैसेज में दाखिल होती है और केबिन में घूस जाती है। दोपहर 3:59:22 - गलियारे में उस छात्रा के केबिन से रोने की आवाज आती है। दौड़कर कुछ लड़कियां अपने अपने केबिन में पानी के लिए जाती हैं। रोना धोना दोपहर 4 बजे तक चलता है, और भी लड़कियां केबिन में घूसने लगती हैं। अब यह समझिए कि SIT की जांच में कहां कमी रह गई? परिवार क्या सवाल उठा रहा है? और CBI के लिए मामला कितना चुनौतीपूर्ण होगा। पढ़िए लीगल एक्सपर्ट हाईकोर्ट के वकीलों की राय पर आधारित यह रिपोर्ट…। अब 10 पॉइंट में समझिए CBI को जांच क्यों सौंपी गई…? 1. सरकार की सबसे बड़ी चुनौती 2 फरवरी से शुरू होनेवाला विधानसभा सत्र बिहार में 2 फरवरी से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र से ठीक पहले NEET छात्रा रेप-मौत केस की जांच CBI को सौंपने के फैसले को सियासी टाइमिंग से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार पर लगातार बढ़ते सवाल, SIT की नाकामी और DNA रिपोर्ट के बाद विपक्ष हमलावर है। ऐसे में सरकार के सामने सदन में हर दिन जवाब देने की मजबूरी बन रही थी। CBI जांच की सिफारिश कर सरकार ने यह संकेत दिया कि अब मामला राज्य पुलिस के हाथ में नहीं रहा। इससे विधानसभा के भीतर सीधे जवाबदेही से बचने का रास्ता खुल गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव लगातार सरकार को घेर रहे हें। उन्होंने लिखा, “बिहार का प्रशासनिक ढांचा भ्रष्ट और अयोग्य है, जो एक रेप-मर्डर केस भी नहीं सुलझा पा रहा।' यही सब सवाल विधानसभा में उठने वाले हैं, इसलिए सीबीआई का रास्ता निकाल लिया गया। 2. SIT 22 दिन में किसी रिजल्ट पर नहीं पहुंची किसी भी संगीन अपराध में शुरुआती दो से तीन दिन ही निर्णय वाले होते हैं। यहां 22 दिन बीतने के बाद भी SIT यह तय नहीं कर पाई कि अपराध कब, कहां और किसने किया। केस थ्योरी बार-बार बदल रही है, पहले सुसाइड, फिर संदिग्ध मौत, फिर रेप। इससे पता चल रहा है कि जांच दिशाहीन चल रही है। DNA मिलान जांच का सबसे प्रमुख हथियार था अब वो भी फेल हो रहा है। 18 सैंपल लिए गए, जिनमें हॉस्टल मालिक, उसके बेटे, हॉस्टल से जुड़े लोग, मददगार, परिजन, लेकिन सभी के सैंपल फेल हो गए। इससे दो बातें निकलती हैं: या तो सही संदिग्धों तक पहुंच नहीं हुई, या सैंपलिंग/सीन-मैनेजमेंट में खामी रही। 3. एम्स की राय अभी तक आई ही नहीं, केस पहले ही ट्रांसफर अभी तक पूरी एसआईटी विशेषज्ञ राय (AIIMS) की रिपोर्ट का इंतजार रही थी। हर सवाल पर एक ही जवाब था, रिपोर्ट का इंतजार करिए। प्राइवेट पार्ट में चोट, कैथेटर थ्योरी, दवाओं का असर, मृत्यु का कारण सभी वहीं से स्पष्ट होना था। SIT अब तक सभी आवश्यक दस्तावेज एकसाथ एम्स को नहीं दे पाई। बिना विशेषज्ञ ओपिनियन के केस डायरी अधूरी है। अब बिना रिपोर्ट का इंतजार किए CBI को जांच सौंप दी गई। 4. सीन ऑफ क्राइम को देर से सील करना, सबूत कमजोर हुए FIR में देरी और हॉस्टल कमरे का समय पर सील न होना। CCTV, DVR का फॉरेंसिक ऑडिट देर से होना, ये सब शुरुआती दौर में ही चूक हुई, इससे सबूत मिट गए। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में प्राइवेट पार्ट में ताजा चोटें, शरीर पर रगड़ के निशान के बावजूद शुरुआती दिनों में सुसाइड पर ही जोर रहा। परिवार का आरोप है कि सुसाइड मानने का दबाव बनाया गया, बार-बार पूछताछ हुई और सुरक्षा नहीं मिली। 5. सीसीटीवी पूरी तरह स्पष्ट नहीं, देर से पहुंची पुलिस 5 जनवरी रात 9:30 से 6 जनवरी दोपहर 2 बजे तक सबसे संदिग्ध समय रहा। यही वो टाइम था, जब छात्रा अपने घर से हॉस्टल पहुंची और पिता से फोन पर बात की। लेकिन इन 17 घंटों का सीसीटीवी पुलिस शायद नहीं जुटा पाई है। या स्पष्ट नहीं है, जिससे यह नहीं पता चल पा रहा कि छात्रा के कमरे का दरवाजा किसने तोड़ा और कब तोड़ा। कमरे में कौन गया और कौन बाहर निकला। 6. सियासत शुरू, लोगों का भरोसा पुलिस से उठता जा रहा लीगल एक्सपर्ट कहते हैं, न्याय केवल होना नहीं चाहिए, होता दिखना भी चाहिए। नीट छात्रा के मामले में पुलिस शुरू से ही ढीला रवैया अपनाती रही। पुलिस की प्राइमरी थ्योरी पर ही एसआईटी आगे बढ़ती रही। यही कारण है कि सियासत तेजी से शुरू हो गई। धरना-प्रदर्शन हुए और अब जिम्मेदारी से बचने के लिए मामला सीबीआई को सौंप दिया गया है। अब जानिए इस पूरे मामले में CBI के सामने क्या चुनौतियां होंगी 1. समय बीतने से साक्ष्य कमजोर होते जा रहे CBI को सबसे बड़ी चुनौती समय की देरी से मिलेगी। घटना को कई हफ्ते बीत चुके हैं। डिजिटल डेटा ओवरराइट हो सकता है, गवाहों के बयानों में अंतर आ सकता है, फिजिकल साक्ष्य की ताजगी कम हो चुकी है। CBI को अब रीकंस्ट्रक्शन के आधार पर केस बनाना होगा, जो हमेशा मुश्किल होता है। 2. एसआईटी की जांच की कमियों को दूर करना CBI को SIT की शुरुआती गलतियों के बावजूद केस को दोबारा खड़ा करना होगा। सीन ऑफ क्राइम, सैंपलिंग और टाइमलाइन की खामियों को बचाव पक्ष कोर्ट में हथियार बनाएगा। CBI को यह दिखाना होगा कि नई जांच कैसे निष्पक्ष और वैज्ञानिक है, ताकि पुरानी थ्योरी केस को न डुबो दें। 3. परिवार-गवाहों का भरोसा जीतना परिवार और कुछ गवाह पहले ही दबाव और डर की बात कह चुके हैं। CBI के लिए जरूरी होगा कि वह गवाहों की सुरक्षा और परिवार का विश्वास बहाल करे। बिना भरोसे के कोई भी गवाह खुलकर बयान नहीं देगा। यह सामाजिक और मनोवैज्ञानिक चुनौती है, सिर्फ कानूनी नहीं। 4. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और एम्स रिपोर्ट का कंपरीजन CBI को पोस्टमॉर्टम, FSL और एम्स ओपिनियन सबको साइंटिफिक तरीके से जोड़ना होगा। मेडिकल राय में जरा-सी गड़बड़ी बचाव पक्ष को संदेह का लाभ दे सकती है। यह सबसे तकनीकी और संवेदनशील चुनौती होगी। CCTV, कॉल डिटेल, टावर डंप और मोबाइल डेटा इन सबका टाइम-सिंक जरूरी है। अगर एक भी डेटा सेट मेल नहीं खाया, तो पूरी डिजिटल थ्योरी कमजोर पड़ जाएगी।
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