बक्सर सांसद सुधाकर सिंह का बजट पर हमला:बिहार का नाम नहीं, गांव-छोटे शहर नजरअंदाज, रेलवे-स्वास्थ्य बदहाल, बजट पूंजीपतियों के लिए
बक्सर से राजद सांसद सुधाकर सिंह ने केंद्रीय बजट को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बार के बजट में बिहार का नाम तक नहीं लिया गया, जो राज्य की सुनियोजित उपेक्षा को दर्शाता है। सांसद सिंह ने कहा कि चुनाव के समय वादों की बौछार होती है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही बिहार को भुला दिया जाता है। सांसद ने बजट में 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के विकास की घोषणाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिहार के अधिकांश जिला मुख्यालयों की आबादी इससे कम है, जिसके कारण राज्य को इन योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश की रीढ़ गांव हैं, लेकिन बजट में गांवों और छोटे शहरों के विकास पर कोई बात नहीं की गई। सुधाकर सिंह ने रेलवे की बदहाली को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने बताया कि आज भी बिहार के लोग ट्रेनों में लटककर यात्रा करने को मजबूर हैं। प्लेटफॉर्म पर भारी भीड़, जनरल डिब्बों में जानलेवा हालात और महीनों पहले रिजर्वेशन के बावजूद कंफर्म टिकट नहीं मिलना आम बात हो गई है। रेल क्षमता विस्तार का कोई जिक्र नहीं
उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में नई ट्रेनों, नए रूट या क्षमता विस्तार का कोई जिक्र नहीं है। सांसद के अनुसार, रेलवे को अब सेवा का नहीं, बल्कि मुनाफे का साधन बना दिया गया है। कैंसर के इलाज को लेकर सांसद ने कहा कि हर साल दवाइयों को सस्ता करने की घोषणाएं होती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत नहीं बदलती। उन्होंने बताया कि बिहार में कोई कैंसर सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल नहीं है, जिससे मरीजों को इलाज के लिए मुंबई जैसे शहरों का रुख करना पड़ता है। गरीब परिवार इलाज के भारी खर्च से टूट जाते हैं। 5 मेडिकल हब की घोषणा
स्वास्थ्य क्षेत्र में निजीकरण की नीति पर निशाना साधते हुए उन्होंने इसे आम जनता के खिलाफ बताया। सांसद सिंह का कहना था कि इससे सरकारी अस्पताल कमजोर होंगे, बीमा कंपनियों और निजी अस्पतालों को फायदा होगा, और इलाज एक व्यवसाय बन जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि मेडिकल टूरिज्म के लिए 5 मेडिकल हब और 3 आयुर्वेद संस्थानों की घोषणा की गई, लेकिन बिहार को इनमें से कुछ भी नहीं मिला। बुद्ध सर्किट और AIIMS पर भी सवाल
सुधाकर सिंह ने कहा कि बुद्ध सर्किट में बिहार, जो बौद्ध धर्म की जन्मस्थली है, उसे ही नजरअंदाज कर दिया गया। साथ ही 9 साल में दरभंगा में AIIMS तक पूरा नहीं हो सका। “सरकार यह संदेश दे रही है कि आगे स्वास्थ्य सेवा भी पूंजीपतियों के भरोसे चलेगी,” उन्होंने कहा। शिक्षा का निजीकरण- गरीबों के सपनों पर चोट
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी विश्वविद्यालयों की जगह निजी विश्वविद्यालय खोलने की नीति से शिक्षा अमीरों तक सीमित हो जाएगी। गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा और मुश्किल हो जाएगी। गर्ल्स हॉस्टल और जमीनी हकीकत
हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल की घोषणा पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि पहले से मौजूद हॉस्टलों की हालत बदतर है। बिहार में पर्याप्त हॉस्टल नहीं होने से छात्राओं की सुरक्षा भी प्रभावित होती है। दोहरा मापदंड और क्षेत्रीय भेदभाव
तटवर्ती इलाकों में नारियल किसानों की मदद की बात कही जा रही है, जबकि लक्षद्वीप जैसे क्षेत्रों में किसानों को उजाड़ा जा रहा है। वहीं मेगा टेक्सटाइल पार्क, डिज़ाइन इंस्टिट्यूट, बुलेट ट्रेन और अन्य बड़े प्रोजेक्ट गुजरात, मुंबई और चुनावी राज्यों में केंद्रित हैं। “यह बजट आम आदमी का नहीं”
अंत में सुधाकर सिंह ने कहा, “यह बजट किसान, मजदूर, छात्र और गरीबों का नहीं है। यह पूंजीपतियों और चुनिंदा राज्यों का बजट है। बिहार को फिर याद दिलाया गया है – वोट दीजिए, लेकिन उम्मीद मत कीजिए।”
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