सहरसा में संत रविदास जयंती मनाई गई:प्रशासनिक अधिकारियों ने माल्यार्पण कर दी श्रद्धांजलि, नाटक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित
सहरसा में रविवार को संत शिरोमणि गुरु रविदास की जयंती श्रद्धा और सामाजिक समरसता के साथ मनाई गई। यह आयोजन शहर के अस्पताल मोड़ स्थित संत रविदास मंदिर परिसर में हुआ। इस अवसर पर जिले के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी दीपेश कुमार, उप विकास आयुक्त (डीडीसी) गौरव कुमार, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी स्नेहा, जिला शिक्षा पदाधिकारी हेमचंद्र और सिविल सर्जन डॉ. राज नारायण राय सहित कई वरीय पदाधिकारी कार्यक्रम में शामिल हुए। रविदास के विचारों को किया याद कार्यक्रम का शुभारंभ संत रविदास की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर किया गया। अधिकारियों और श्रद्धालुओं ने संत रविदास के विचारों को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। मंदिर प्रांगण में सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक भजन-कीर्तन, रचित भजनों का गायन और लोकगीतों की प्रस्तुति हुई। इस दौरान श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण भी किया गया, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय माहौल से भर गया। उत्सव के रूप में मनाई जाती है रविदास जयंती इस अवसर पर जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने कहा कि संत रविदास जयंती प्रतिवर्ष 1 फरवरी को उत्सव के रूप में मनाई जाती है। उन्होंने संत रविदास को एक महान संत, कवि और समाज सुधारक बताया, जिनके जीवन और विचार आज भी समाज को नई दिशा प्रदान करते हैं। जिलाधिकारी ने उनके प्रसिद्ध संदेश "मन चंगा तो कठौती में गंगा" का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मानव को आंतरिक शुद्धता और नैतिकता का पाठ पढ़ाता है। उन्होंने आगे कहा कि संत रविदास ने जाति-पाति से ऊपर उठकर समाज में भाईचारे, समानता और एकता का संदेश दिया। उनका दर्शन आज के समाज में अत्यंत प्रासंगिक है। नाटक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा रविदास जयंती के अवसर पर 'रविदास महोत्सव' का आयोजन किया जाएगा। इसमें नाटक, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और अन्य कार्यक्रम शामिल होंगे, जिससे नई पीढ़ी संत रविदास के विचारों से प्रेरणा ले सके। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। पूरे आयोजन ने सामाजिक सौहार्द, एकता और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त संदेश दिया।
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