लापता बच्चों के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार को लगायी फटकार, 27 जनवरी को गृह सचिव होंगे पेश
Jharkhand High Court, रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने गुमला जिले में सात साल से लापता छह साल की नाबालिग बच्ची के मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीर चिंता जताई है. जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की बेंच ने बुधवार को सुनवाई के दौरान कहा कि बच्ची को बरामद करने में पुलिस का रवैया बेहद चिंताजनक है. कोर्ट ने बच्चों की तस्करी को समाज के लिए गंभीर खतरा बताते हुए कहा कि इससे बच्चों का शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास बुरी तरह प्रभावित होता है.
गृह सचिव 27 जनवरी को अदालत सामने रखेंगे बात
कोर्ट ने यह भी कहा कि राजस्थान सहित कुछ अन्य राज्यों से झारखंड में आने वाले गुलगुलिया समुदाय के लोग कई स्थानों पर टेंट लगा कर रहते हैं. ऐसे लोगों की पहचान और निगरानी के लिए राज्य सरकार के पास स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं. पुलिस द्वारा ना तो उनका आधार कार्ड चेक किया जाता है और ना ही उनकी पहचान सुनिश्चित की जाती है. दो जजों की बेंच ने स्पष्ट निर्देश दिये हैं कि 27 जनवरी को होने वाली सुनवाई में राज्य के गृह सचिव को वर्चुअल तरीके से उपस्थित होना होगा.
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सशरीर उपस्थित रहे पुलिस अधीक्षक
केस की सुनवाई के दौरान गुमला के पुलिस अधीक्षक सशरीर उपस्थित रहे. उन्होंने अदालत को बताया कि लापता बच्ची को बरामद करने के लिए पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है. उनका कहना था कि पदभार संभालने के बाद से ही उन्होंने एसआईटी गठन किया. बच्ची की सकुशल बरामदगी के लिए राज्य से बाहर तीन एसआईटी भेजी जा चुकी है, लेकिन बच्ची का अब तक कोई सुराग नहीं मिला. हालांकि, इस दौरान नौ अन्य बच्चों को बरामद किया गया है. एसपी ने कहा कि वह खुद मामले की निगरानी कर रहे हैं और दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेंगे.
6 फरवरी 2020 को हुई थी एफआईआर दर्ज
झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यह भी जानकारी दी गई कि रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र सहित अन्य इलाकों से बच्चों के अपहरण के मामलों में एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. पुलिस लगातार मानव तस्करी से जुड़े नेटवर्क की जांच कर रही है. मामले की याचिका लापता बच्ची मां चंद्रमुनि उराईंन ने दायर की थी. पुलिस ने 6 फरवरी 2020 को एफआईआर दर्ज की थी. विशेष जांच टीम (SIT) का गठन 29 अगस्त 2025 को किया गया था. हाईकोर्ट ने मामले में पुलिस और राज्य प्रशासन को कठोर संदेश देते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाया जाए.
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