जमीन से 40 फीट नीचे और 60 फीट ऊपर बना अर्थशिला, पटना को मिला अनोखा वर्टिकल ऑडिटोरियम

Jan 28, 2026 - 12:30
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जमीन से 40 फीट नीचे और 60 फीट ऊपर बना अर्थशिला, पटना को मिला अनोखा वर्टिकल ऑडिटोरियम

Bihar News: बिहार की राजधानी पटना के सीने पर एक ऐसी इमारत खड़ी हुई है, जिसे देखकर वास्तुकला के बड़े-बड़े दिग्गज दांतों तले उंगली दबा रहे हैं. गोला रोड में करीब 45 करोड़ की लागत से तैयार हुआ ‘अर्थशिला’ कोई मामूली बिल्डिंग नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग का एक करिश्मा है.

यह अनूठा वर्टिकल ऑडिटोरियम जमीन के 60 फीट ऊपर तो दिखता ही है, लेकिन इसका असली जादू जमीन के 40 फीट नीचे छिपा है. 10 साल की कड़ी मेहनत के बाद तैयार हुए इस ‘कला के मंदिर’ को देखने के लिए अब आम लोगों की भीड़ उमड़ रही है. करीब ₹45 करोड़ की लागत और 10 साल की लंबी मेहनत के बाद तैयार हुआ ‘अर्थशिला पटना’ अब आम लोगों के लिए खोल दिया गया है.

जमीन के नीचे बसी कला की दुनिया

‘अर्थशिला’ की सबसे बड़ी खासियत इसकी वर्टिकल संरचना है. इस कला भवन के चार फ्लोर जमीन के नीचे बनाए गए हैं, जो करीब 40 फीट गहराई तक जाते हैं. उद्देश्य साफ है—बाहर के शोर, रोशनी और तापमान से पूरी तरह अलग एक शांत और शुद्ध सांस्कृतिक माहौल तैयार करना.

जमीन के नीचे बना यह ऑडिटोरियम आधुनिक तकनीक से लैस है, जहां दर्शक बिना किसी व्यवधान के नाटक, संगीत, कविता पाठ और अन्य प्रस्तुतियों का आनंद ले सकते हैं. यह बिहार का पहला ऐसा ऑडिटोरियम है, जहां अंडरग्राउंड मंचन की सुविधा दी गई है.

बिना माइक के भी हर सीट तक पहुंचेगी आवाज

इस ऑडिटोरियम की पहचान इसकी बेहतरीन एकॉस्टिक डिजाइन है. आर्किटेक्ट सौरभ गुप्ता द्वारा तैयार किए गए इस स्ट्रक्चर में ध्वनि को इस तरह नियंत्रित किया गया है कि कलाकार बिना माइक के भी अंतिम पंक्ति में बैठे दर्शकों से सहज संवाद कर सके.

यही वजह है कि यह सिर्फ एक भवन नहीं, बल्कि ध्वनि और संरचना के विज्ञान का बेहतरीन उदाहरण बन गया है. थिएटर और शास्त्रीय संगीत जैसे कार्यक्रमों के लिए यह जगह बेहद आदर्श मानी जा रही है.

ग्रीक थिएटर से प्रेरित वास्तुकला

‘अर्थशिला’ का डिजाइन ग्रीक थिएटर की अवधारणा से प्रेरित है, जहां ऊंचाई और दर्शक दीर्घा का सीधा संबंध होता है. यहां बैठकर दर्शकों को मंच से एक विशेष तरह का जुड़ाव महसूस होता है.

भवन की ऊपरी ऊंचाई करीब 60 फीट है और पूरा स्ट्रक्चर सीमित जमीन में खड़ा होकर भी भव्यता का अहसास कराता है. निर्माण में कॉर्टन स्टील जैसे आधुनिक और मजबूत मटेरियल का इस्तेमाल किया गया है, जिससे इसकी फिनिशिंग बेहद प्रीमियम नजर आती है.

2016 में रखी गई थी आधारशिला, 2026 में पूरा सपना

23 अप्रैल 2016 को इस परियोजना की आधारशिला रखी गई थी. उस दिन गुलजार, श्याम बेनेगल, पंडित बिरजू महाराज, सुबोध गुप्ता और संजना कपूर जैसी हस्तियों ने इसकी नींव रखी थी. करीब 10 साल की लंबी प्रक्रिया के बाद आज यह सपना हकीकत बन चुका है.

एक समय में 120 दर्शकों की क्षमता वाला यह ऑडिटोरियम छोटे लेकिन उच्च गुणवत्ता वाले सांस्कृतिक आयोजनों के लिए तैयार किया गया है.

27 जनवरी से मुफ्त एंट्री, सोमवार को रहेगा बंद

27 जनवरी से आम लोग यहां निःशुल्क प्रदर्शनी देख सकते हैं. प्रवेश का समय सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक रखा गया है. हर सोमवार को यह परिसर बंद रहेगा. अर्थशिला के संस्थापक संजीव कुमार के अनुसार, यह तक्षशिला एजुकेशनल सोसाइटी की एक पहल है और उनका सपना था कि पटना में ऐसा मंच बने, जहां कला, संस्कृति और शांति का संगम हो. उनके लिए ‘अर्थशिला’ एक ड्रीम प्रोजेक्ट है.

पटना को मिली नई सांस्कृतिक पहचान

‘अर्थशिला’ अब सिर्फ एक ऑडिटोरियम नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक महत्वाकांक्षा का प्रतीक बन गया है. यहां स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों को भी मंच मिलेगा. यह इमारत साबित करती है कि पटना अब सिर्फ ऐतिहासिक शहर नहीं, बल्कि आधुनिक सांस्कृतिक प्रयोगों का केंद्र भी बन रहा है.

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Vikash Kumar Editor-in-chief