प्लीज बचा लीजिए... घायल तोते को अस्पताल लेकर पहुंचा युवक, भावुक हुए डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ
भोजपुर के टाउन थाना क्षेत्र के शांति नगर मोहल्ले में उस वक्त सभी हैरान रह गए, जब राजेन्द्र सिंह का बेटा नीलेश अपनी गोद में एक लहूलुहान तोते को लेकर अस्पताल पहुंचा. आमतौर पर अस्पताल में इंसानों का इलाज होता है, लेकिन उस दिन एक बेजुबान पक्षी की जान बचाने की कोशिश हो रही थी. नीलेश के चेहरे पर डर और आंखों में आंसू साफ दिख रहे थे, लेकिन उसका हौसला मजबूत था. उसने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ से हाथ जोड़कर कहा कि यह तोता उसके लिए सिर्फ एक पक्षी नहीं, बल्कि परिवार का सदस्य है. वह रोज उसकी देखभाल करता है, उससे बातें करता है और उसकी चहचहाहट से ही घर की सुबह शुरू होती है.यह नजारा देखकर डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ भी भावुक हो गए. कुछ पल के लिए अस्पताल का माहौल बदल गया. इंसानों के इलाज वाले अस्पताल में एक पक्षी के लिए ऐसी गुहार शायद ही किसी ने पहले देखी हो. लेकिन वहां मौजूद किसी भी डॉक्टर या नर्स ने नियम-कानून का हवाला नहीं दिया. सबने इसे इंसानियत की पुकार समझा.नर्सिंग स्टाफ ने तुरंत तोते को संभाला, उसके घाव साफ किए गए और डॉक्टरों ने पूरी संवेदनशीलता के साथ उसकी जांच की. किसी ने यह नहीं कहा कि यह अस्पताल केवल इंसानों के लिए है. हर किसी ने दिल से मदद करने की कोशिश की.अस्पताल में मौजूद लोग यह दृश्य देखकर भावुक हो उठे. कोई कह रहा था कि आज भी इंसानियत जिंदा है. नीलेश हर पल तोते के पास खड़ा रहा, उसे सहलाता रहा और दुआ करता रहा, जैसे कोई पिता अपने बच्चे के लिए करता है. भले ही तोते की हालत गंभीर थी, लेकिन नीलेश की कोशिश और डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ की संवेदना ने यह साबित कर दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है और बेजुबानों के दर्द को समझना ही सच्चा इंसान होना है.
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