पटना हॉस्टल कांड: प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बड़ा फर्क, आखिर कब सामने आएगा NEET छात्रा की मौत का सच?

Jan 20, 2026 - 00:30
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पटना हॉस्टल कांड: प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बड़ा फर्क, आखिर कब सामने आएगा NEET छात्रा की मौत का सच?

Patna NEET Student Death Case: पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा के साथ हुए दुष्कर्म और मौत मामले में अब नया मोड़ आ गया है. प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल की मेडिकल रिपोर्ट सामने आने के बाद पूरे केस पर बहस तेज हो गई है. हॉस्पिटल की रिपोर्ट और PMCH की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बड़ा फर्क सामने आया है. एक में यौन हिंसा की बात सामने आई है और एक में नहीं.

प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल की रिपोर्ट के मुताबिक, छात्रा जब अस्पताल लाई गई थी तब उसकी हालत बेहद गंभीर थी. रिपोर्ट में बताया गया है कि छात्रा करीब छह घंटे से बेहोशी की हालत में थी. उसकी सांसें कमजोर हो रही थीं. दिमाग ठीक से काम नहीं कर रहा था. डॉक्टरों ने इसे सामान्य बेहोशी नहीं, बल्कि गंभीर मेडिकल इमरजेंसी बताया है.

छात्रा को ICU में क्यों किया गया था शिफ्ट?

हॉस्पिटल रिकॉर्ड के अनुसार छात्रा को 6 जनवरी 2026 की शाम 7:40 बजे इमरजेंसी में लाया गया. उस समय उसका ऑक्सीजन लेवल तेजी से गिर रहा था. आंखों की पुतलियां पूरी तरह सिकुड़ी हुई थीं. हालत को देखते हुए उसे तुरंत ICU में शिफ्ट किया गया. रिपोर्ट में साफ लिखा है कि समय पर इलाज नहीं मिलता तो उसकी सांस रुक सकती थी.

मेडिकल रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि छात्रा ने कोई नशीली दवा ली थी. ड्रग स्क्रीनिंग रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी. डॉक्टरों का कहना है कि नशे की दवाएं दिमाग और नसों की गतिविधि को धीमा कर रही थीं. इसी वजह से सांस लेने की गति लगातार कम हो रही थी. हॉस्पिटल ने इसे संदिग्ध ड्रग पॉइजनिंग का मामला बताया है. हालांकि यह अब जांच का विषय है कि दवा छात्रा ने खुद ली या जबरन खिलाई गई.

ब्रेन में सूजन, दिमाग के निचले हिस्से में ब्लड क्लॉट

रिपोर्ट में दिमाग से जुड़ी गंभीर समस्या का भी जिक्र है. CT स्कैन में ब्रेन में सूजन पाई गई. दिमाग के निचले हिस्से में हल्का ब्लड क्लॉट भी मिला. डॉक्टरों के अनुसार इससे बेहोशी, झटके और जान का खतरा बढ़ जाता है. हालांकि किसी बड़े फ्रैक्चर की पुष्टि नहीं हुई.

छात्रा को वेंटिलेटर सपोर्ट क्यों देना पड़ा?

तीसरी बड़ी समस्या फेफड़ों से जुड़ी थी. चेस्ट एक्स-रे में दाहिने फेफड़े में निमोनिया के लक्षण मिले. डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक बेहोशी या ड्रग्स के असर में रहने से ऐसा होता है. गंदगी सांस की नली में चली जाती है और फेफड़ों में इंफेक्शन हो जाता है. इसी कारण छात्रा को वेंटिलेटर सपोर्ट देना पड़ा.

टेस्ट में लिवर एंजाइम भी पाए गए

रिपोर्ट में लिवर से जुड़ी परेशानी भी सामने आई. खून की जांच में लिवर एंजाइम काफी ज्यादा पाए गए. शरीर में जरूरी प्रोटीन की मात्रा भी कम थी. डॉक्टरों ने इसे Drug Induced Hepatitis बताया. यानी नशीली दवाओं का असर सीधे लिवर पर पड़ा.

पांचवीं और अहम बात छात्रा का अत्यधिक तनाव है. Cortisol लेवल सामान्य से कई गुना ज्यादा पाया गया. डॉक्टरों के मुताबिक इतना ज्यादा तनाव गंभीर ट्रॉमा या ड्रग ओवरडोज की स्थिति में देखा जाता है.

प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल की रिपोर्ट में दुष्कर्म नहीं

हालांकि प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल की रिपोर्ट में दुष्कर्म जैसे स्पष्ट लक्षण नहीं लिखे गए हैं. न ही प्राइवेट पार्ट पर गंभीर चोट या ज्यादा ब्लीडिंग का जिक्र है. हॉस्पिटल का कहना है कि मामले को मेडिको लीगल मानते हुए पुलिस को सूचना दी गई थी. हालांकि इस मामले में प्रभात खबर की टीम अस्पताल प्रशासन से बात करने का प्रयास की लेकिन मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया गया. अस्पताल के गेट पर नोटिस चिपका दिया गया.

prabhat memorial notice
प्रभात मेमोरियल अस्पताल के गेट पर नोटिस

PMCH की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने मामले को पलटा

लेकिन PMCH में गठित मेडिकल बोर्ड की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पूरे मामले को पलट दिया. पोस्टमॉर्टम में छात्रा के शरीर पर कई ताजा और गंभीर चोटें पाई गई हैं. रिपोर्ट के अनुसार ये सभी चोटें मौत से पहले की हैं. डॉक्टरों ने गर्दन, कंधे और चेस्ट पर Crescentic Nail Abrasions पाए. ये नाखून से बने गहरे घाव हैं.

छाती और कंधे के नीचे कई खरोंच

डॉक्टरों के अनुसार ऐसे निशान तब मिलते हैं जब पीड़िता खुद को बचाने की कोशिश करती है. छाती और कंधे के नीचे कई खरोंच के निशान भी मिले हैं. इससे साफ है कि लंबे समय तक संघर्ष हुआ. पीठ पर नीले निशान पाए गए हैं. इससे अंदाजा लगाया गया कि छात्रा को कठोर सतह पर दबाया गया या घसीटा गया. डॉक्टरों का मानना है कि संघर्ष काफी देर तक चला. एक से अधिक लोगों के शामिल होने की आशंका भी जताई गई है.

प्राइवेट पार्ट में ताजा और गंभीर चोटें, रगड़ के निशान

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का सबसे अहम हिस्सा जननांग की जांच है. रिपोर्ट में प्राइवेट पार्ट में ताजा और गंभीर चोटें दर्ज हैं. गहरी रगड़ के निशान हैं और काफी ब्लीडिंग हुई है. मेडिकल बोर्ड ने इसे forceful penetration का मामला बताया है. डॉक्टरों ने स्पष्ट लिखा है कि ये चोटें सहमति से बने संबंध की नहीं हैं. रिपोर्ट में sexual violence की पुष्टि की गई है. मौत के अंतिम कारण को लेकर विसरा (रहस्यमयी और संदिग्ध मौत) सुरक्षित रखा गया है. रिपोर्ट को आगे की जांच के लिए दिल्ली एम्स भेजा गया है.

दो से तीन दिन में आ सकती है रिपोर्ट- ADG

अब सवाल यह है कि शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट और पोस्टमॉर्टम में इतना बड़ा अंतर क्यों है? इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ पाएगा. ADG CID पारसनाथ ने भी जांच को लेकर जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि FSL की पूरी टीम हॉस्टल पहुंची थी. हर बिंदु पर बारीकी से जांच की गई है. उन्होंने बताया कि दो से तीन दिन में रिपोर्ट आने की संभावना है.

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Vikash Kumar Editor-in-chief