वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सान्याल बाबा का 97वां वार्षिकोत्सव शुरू
बौंसी. प्रसिद्ध गुरुधाम आश्रम परिसर में श्री श्री गुरु महाराज सान्याल बाबा के जन्मोत्सव के साथ ही 97वां वार्षिकोत्सव शनिवार से भक्ति और वैदिक परंपराओं के साथ भव्य रूप से शुरू हो गया. इस आध्यात्मिक महाकुंभ के आरंभ होते ही पूरा आश्रम परिसर देश-विदेश से आए भक्तों, विद्वानों और शिष्यों की उपस्थिति से गुलजार हो उठा.
हवन-पूजन व गुरु वंदना से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का आगाज शनिवार की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चार, हवन-यज्ञ व गुरु वंदना के साथ हुआ. देश के कोने-कोने से जुटे श्रद्धालुओं ने सान्याल बाबा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया और उनके दिखाए सत्य व साधना के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया. वेद पाठ व उपनिषदों की शिक्षाओं पर आधारित आध्यात्मिक चर्चा ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया.
भक्ति व सत्संग की बहेगी धारा
पूरे दिन आश्रम में भजन-कीर्तन और सत्संग का दौर चलता रहा. सान्याल बाबा और लाहिरी बाबा की शिक्षाओं का स्मरण करते हुए वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा. आश्रम प्रबंधन के अनुसार, यह महोत्सव अगले पांच दिनों तक निरंतर चलेगा, जिसमें:
प्रतिदिन सुबह-शाम भजन, कीर्तन और गीता पाठ का आयोजन होगा.
वरिष्ठ गुरुओं का वार्षिकोत्सव मनाया जाएगा व श्रद्धालुओं को गुरु दीक्षा दी जाएगी. अंतिम दिन शिव पंचायतन पूजा के साथ इस भव्य अनुष्ठान का समापन होगा. जन्मोत्सव के पहले दिन ही आश्रम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई. गुरु के जयकारों से पूरा परिसर गूंजता रहा. शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित आयोजन को लेकर आश्रम के स्वयंसेवक मुस्तैद रहे ताकि बाहर से आए भक्तों को दर्शन और पूजन में किसी प्रकार की कठिनाई न हो.
गुरु धाम वेद, शिक्षा व सनातन संस्कृति के संरक्षण को दे रहा बढ़ावा
मंदार गुरु धाम, जो वर्षों से वेद शिक्षा व सनातन संस्कृति के संरक्षण हेतु समर्पित रहा है, ने अपने 97 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को स्मरण करते हुए वेद विद्यापीठ की उपलब्धियों को साझा किया. गुरुधाम के पंडित गंगाधर मिश्र ने कहा कि यह धाम न केवल शिक्षा का केंद्र है, बल्कि भारतीय संस्कृति व आध्यात्मिक मूल्यों का जीवंत प्रतीक भी है. आश्रम के वरिष्ठ संतों व विद्वानों ने अपने संबोधन में सान्याल बाबा के जीवन, तपस्या व समाज के प्रति उनके योगदान पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि गुरु महाराज ने वेद, धर्म व मानव सेवा को जीवन का उद्देश्य बनाकर समाज को दिशा देने का कार्य किया. गुरु काशीपति सन्याल ने समाज को आध्यात्मिक चेतना, सेवा और सदाचार का मार्ग दिखाया. उनके द्वारा स्थापित गुरुधाम आज भी मानवता, प्रेम व सत्य का संदेश दे रहा है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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