बेगूसराय में गवाह की हत्या से पहले अपराधी अरेस्ट:जेल से रची गई थी मुन्ना सिंह मर्डर केस के गवाह की हत्या की साजिश; हथियार, कारतूस बरामद
बेगूसराय में एक हत्याकांड के गवाह की हत्या की साजिश को पुलिस ने नाकाम कर दिया है। इस मामले में 5 कुख्यात अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से तीन हथियार और भारी मात्रा में गोली बरामद किए गए हैं। जिस मोबाइल के माध्यम से जेल से हत्या की लाइजनिंग की जा रही थी, वह भी पुलिस ने बरामद कर लिया है। बुधवार को नगर थाना में आयोजित प्रेसवार्ता में सदर-वन डीएसपी आनंद कुमार पांडेय ने बताया कि घटना होने से रोक दिए जाने के लिए बेगूसराय पुलिस सजग रहती है। हम लोगों को टेक्निकल इनपुट मिला था कि दो कुख्यात अपराधी सूरज और विमलेश कई हत्याकांड का आरोपी है और दोनों अभी जेल में बंद है यह लोग मुन्ना सिंह हत्याकांड के गवाह की हत्या करना चाहते हैं। इनपुट मिलने के बाद 5 अपराधियों को गिरफ्तार किया, हथियार बरामद इनपुट मिलते ही एसपी के निर्देश पर मेरे नेतृत्व में एसटीएफ की टीम, डीआईयू की टीम एवं नगर थानाध्यक्ष की टीम इनपुट के आधार पर छापेमारी कर पांच अपराधियों को पकड़ा है। घटना का प्लानिंग किए जाने वाले मोबाइल सहित चार मोबाइल बरामद किया गया है। बदमाशों के पास से दो पिस्टल, एक पिस्तौल, एक मैगजीन एवं 22 गोली बरामद किए गए हैं। हत्या की लाइजनिंग करने वाले बदमाश पर 14 मामले दर्ज हैं पकड़े गए बदमाश मटिहानी थाना क्षेत्र के मटिहानी गांव का रहने वाला चंदन कुमार तथा सिंघौल थाना के उलाव शर्मा टोला का रहने वाला प्रीतम कुमार, मचहा गांव का रहने वाला निगम कुमार, मचहा गांव का रहने वाला गुलशन कुमार एवं मचहा गांव का ही रहने वाला रवीश कुमार है। इसमें से चंदन कुमार बाहर में हत्या की लाइजनिंग कर रहा था, जिस पर 14 मामले दर्ज हैं। डीएसपी बोले- जेल में बंद बदमाशों को जल्द रिमांड पर लेंगे डीएसपी ने बताया कि पुलिस की मुस्तैदी के कारण जेल से रची गई हत्या की साजिश को नाकाम किया गया है। घटना में शामिल सभी अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। जेल में बंद दोनों बदमाशों सूरज कुमार और विमलेश सिंह उर्फ अमलेश सिंह को भी रिमांड पर लिया जाएगा। कोर्ट कैंपस के आसपास हत्या की तैयारी की गई थी। लेकिन इनपुट मिल जाने से बड़ी घटना टल गई है। पकड़े गए सभी बदमाशों का आपराधिक इतिहास है। जेल में बंद अपराधी का नाम सूरज कुमार और विमलेश सिंह उर्फ अमलेश सिंह ने हत्या करने के लिए सुपारी ली थी। जेल में बंद सूरज घटना का सबसे बड़ा मास्टरमाइंड है तथा बाहर से चंदन लीड कर रहा था। फिलहाल एसटीएफ सहित पूरी टीम इस मामले में और काम कर रही है। जिसमें बड़ा खुलासा होने की संभावना है, इसके बाद पुलिस और जानकारी साझा करेगी। प्रेसवार्ता में नगर थानाध्यक्ष प्रदीप कुमार सहित अन्य उपस्थित थे। अब जानिए, कैसे पुलिस पांचों अपराधियों तक पहुंची पुलिस टीम ने सबसे पहले सिंघौल थाना क्षेत्र के मचहा से निगम कुमार को एक मोबाइल साथ पकड़ा। पुछताछ में निगम कुमार ने बताया कि जेल में बंद सूरज कुमार एवं विमलेश कुमार ने मुन्ना सिंह हत्याकांड के गवाह की हत्या करने के लिए पांच लाख की सुपारी दी गई थी। निगम कुमार के निशानदेही पर हरहर महादेव चौक के नजदीक एक बाइक पर सवार गुलशन कुमार, रविश कुमार एवं प्रीतम कुमार को पकड़ा गया। प्रीतम कुमार के पास से लोडेड देशी पिस्टल, 3 गोली एवं मोबाईल बरामद किया गया। प्रीतम कुमार ने पूछताछ करने पर बताया कि हम तीनों मुन्ना सिंह हत्याकांड के गवाह के हत्या करने के लिए घुम रहे थे। हथियार और गोली चंदन कुमार ने दिया तथा उसके पास और भी हथियार है। प्रीतम कुमार की निशानदेही पर बड़ी एघु दुर्गा मंदिर के नजदीक से छापामारी कर चंदन कुमार को पकड़ा गया। तलाशी में चंदन कुमार के पास से 1 देशी पिस्टल, 1 देशी पिस्तौल, 1 मोबाईल एवं 19 गोली बरामद किया गया। 8 अक्टूबर 2017 को हुई थी मुन्ना सिंह की हत्या रामदीरी पंचायत-दो के पूर्व मुखिया रामनगर निवासी मुन्ना सिंह की 8 अक्टूबर 2017 को सुबह करीब 10 बजे घर से खाना खाकर बाइक से अकेले जा रहे थे। कछुवा राही बहियार के समीप पहले से घात लगाए चार अपराधियों ने उनपर गोलियां बरसा दीं। मुन्ना सिंह के सीने में बाईं ओर तथा बांह में गोली लगी। घायल मुन्ना सिंह को स्थानीय लोग तुरंत शहर के एक निजी नर्सिंग होम ले गए जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मुन्ना सिंह के हत्या की प्राथमिकी मृतक के पुत्र मुखिया अभय कुमार ने दर्ज कराई थी। मामला विचारण के दौरान सूचक सह मृतक के पुत्र अभय कुमार की हत्या की साजिश रची गई थी। इतना ही नहीं गवाह की हत्या का प्रयास न्यायालय परिसर में किया गया था, जिसमें पुलिस की तत्परता से नाकाम कर दिया गया था। मुन्ना सिंह पहले कुख्यात अपराधी था, एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज थे मुन्ना सिंह पहले कुख्यात अपराधी था। उनके खिलाफ मटिहानी समेत विभिन्न थानों में एक दर्जन से अधिक संगीन मामले दर्ज थे। सिर्फ रामदीरी ही नहीं बल्कि दियारा क्षेत्र में भी लगभग 25 वर्षों तक सल्तनत कायम रही। रामदीरी के चारों पंचायत में उसका दबदबा था। क्षेत्र से मुखिया, जिला परिषद, पंचायत समिति, सरपंच आदि चुनाव में जो चाहते वही होता था। 2002 में वह खुद मुखिया बने। इसके बाद उसकी पत्नी वीणा देवी दो बार मुखिया बनी। चौथे टर्म में मुन्ना सिंह के पुत्र अभय कुमार सिंह मुखिया के पद पर जीते। पुरानी रंजिशों की बात करें तो बीते 25 वर्षों से आकाशपुर रामदीरी निवासी कुख्यात मोहन सिंह एवं काले सिंह के साथ उसका विवाद लगातार बना रहा। इस विवाद में दर्जनों युवक की मौत भी हुई। मुन्ना सिंह की दबदबा का आलम यह था कि उस क्षेत्र में पैदा होने वाले नए अपराधियों का एक बार उनसे टकराव जरूर होता था। चाहे वह रामदीरी के श्रुति सिंह हो या पंकज सिंह। लेकिन उनके सामने कोई टिके नहीं। सबके सब पुलिस के हाथों या अन्यत्र मारे गए। लेकिन मुन्ना का दबदबा जस का तस कायम रहा। मुन्ना सिंह के चाचा सारंगधर सिंह की हत्या 1993 में बेगूसराय शहर के टेढीनाथ मंदिर के समीप बदमाशों ने दिया था।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0